कथनी और करनी…

Kathni or Karni

आज यहाँ एक नेता ये पहचान बनाने बैठा है,
सत्ता में रहने के लिए ईमान गवाने बैठा है !
एक भी गुण नहीं है उसमें जन सेवक के जैसे,
बन बहरूपिया वो जग में सबको बहकाने बैठा है !!

वो कहे कि गांधी मेरा है, पर हिंसा वो फैलाते हैं,
समझाने की क्या बात करें, बस लोगों को धमकाते हैं !
वो क्या सत्यवादी होंगे, जो झूठा प्रचार करे,
दिन अच्छे सबके आएंगे, बस ये कह कर बहकाते हैं !!

वो कहे कि अम्बेडकर मेरा है, पर दलितों को ठुकराते हैं,
बस दलित विरोधी करतब को, अमलीजामा पहनाते हैं !
नहीं हो जाए कभी एकजुट ये, सो धर्म – जात में बांट दिया,
फिर उन्मादी विष लेकर ये, सब लोगों को लड़वाते हैं !!

वो कहे भगत सिंह मेरा है, पर समाजवाद नहीं लाते हैं,
पाएं सब शोषण से मुक्ति, ये कहने से कतराते हैं !
दिन – रात मरें मजदूर – किसान, पर इनको कुछ चिंता ही नहीं,
गर भगत सिंह सा बने कोई उसको गद्दार बताते हैं !!

कथनी – करनी में फर्क यहाँ, नेताओं के दिख जाते हैं,
जब सारे महापुरुषों को वो, अपना आदर्श बताते हैं !
पर ये तो महज़ दिखावा है, सत्ता हासिल करने के लिए,
जब सत्ता मिल जाएं तो फिर अपनी फिदरत दिखलाते हैं !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment

वो कौन है ???

images (2)

ये पर्वत भी अब चीख रही, आकाश गरज कर बोला है !
किसने इन मस्त फ़िज़ाओं में, उन्माद भरा विष घोला है !!

वो कौन है ? जिसने हम सब का बुनियादी हक़ भी मार लिया !
वो कौन है ? जिसने मानवता को शर्म से तार – तार किया !!

वो कौन है ? जिसने हिन्द में धरम का राग छेड़ा है !!
वो कौन है ? जिसने मानवता को तिनके की तरह बिखेरा है !

वो कौन है ? जिसने सूरज की उगती किरणों को छिपा लिया !
वो कौन है ? जिसने मजहबी हिंसा की आग को हवा दिया !!

वो कौन है ? जिसने मासूमों के सीने में ख़ंजर घुसा दिया !
वो कौन है ? जिसने औरों के घर के दीपक को बुझा दिया !!

वो कौन है ? जिसने आ करके मंदिर – मस्जिद तुड़वाये थे !
वो कौन है ? जिसने सत्ता के लिए हिन्दु – मुस्लिम लड़वाए थे !!

यहाँ बंट कर धर्म और जाति में, मानव ऐसा जीवन जीता हैं !
एक मानव का छुआ हुआ पानी, दूजा मानव नहीं पीता है !!

वो कौन है ? जिसने हम सब को धर्म – जात में बांटा है !
किसने मजदूर-किसानों के मेहनत की फसल को काटा है !!

वो महज एक उन्वादी है, सत्ता – पैसा हथियाने वाला !
हक़ अपना न हम ले बैठे, हमें आपस में लड़वाने वाला !!

अब तो उसकी पहचान करो, जिसने हमको गुमराह किया !
हर एक भरोसे पर जिसने, हमें कई जन्म का घाव दिया !!

 

Posted in Uncategorized | Leave a comment

मेरी लाडली…

Meri Ladli

प्रेम प्याला लेकर, मेरे घरआई एक नन्ही परी,
पाकर उसको सब दुःख भूला, खुशियों की लग गई लडी !
फिर से बचपन में जा पहुँचा, संग उसके बच्चा बन कर,
मेरे मुरझाये जीवन को, हर्षित करती मेरी लाडली !!

थकु न उसकी बातें सुन कर, बातें उसकी प्यारी है,
उसकी तोतली बोली पर, मैंने ये दुनियां वारी है !
हर पल मेरा मन मोहे, बातें उसकी मिश्री की डली,
मेरे मुरझाये जीवन को, हर्षित करती मेरी लाडली !!

मेरी आँखों की ठंडक वो, वो मेरे दिल की शहजादी,
उसके संग खुश रहने का, मेरा दिल भी हो गया आदी !
वो चंचल, वो चित मोहिनी, मेरी बगिया की प्यारी कली,
मेरे मुरझाये जीवन को, हर्षित करती मेरी लाडली !!

वो चहके मेरी बगिया में, बिखरे हल पल छटा सुनहरी,
नटखट सी करतब करती है, मेरे उपवन में दिन – दोपहरी !
मेरे जीवन में फिरती है, वो बन कर एक चंचल तितली,
मेरे मुरझाये जीवन को, हर्षित करती मेरी लाडली !!

फिर उस संग बचपन में लौटा, ये लम्हा कैसे भूलूँ मैं,
बन कर उस संग छोटा बच्चा, संग उसके झूला झूलूँ मैं !
मिली मुझे ये नन्ही परियाँ, इस संग है हर सुख असली,
मेरे मुरझाये जीवन को, हर्षित करती मेरी लाडली !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment

आजाद परिंदे भारत के….

Happy-Independence-Day-Wishes-Wallpaper-21

हम भगत सिंह के दीवाने, उनकी यादों के रखवाले हैं !
ये आज़ाद परिंदे भारत के, इतिहास बनाने वाले हैं !!

उनके आदर्शों को हमने, अपने जीवन में उतारा है,
हो पूरा उनका हर सपना, अब ये संकल्प हमारा है !
हम भगत सिंह के सपनों से, ये देश सजाने वाले हैं,
ये आज़ाद परिंदे भारत के, इतिहास बनाने वाले हैं !!

एक 23 साल के युवक ने, आज़ादी का मतलब बता दिया,
उसके इंक़लाब के नारों ने, अंग्रेजों को धूल चटा दिया !
जो भूल चुके हैं कुर्बानी, उन्हें याद दिलाने वाले हैं ,
ये आज़ाद परिंदे भारत के, इतिहास बनाने वाले हैं !!

मज़दूरों के हक़ के खातिर, वर्षों के लिए वो जेल गए,
आज़ाद वतन करवाने को, सब अत्याचार वो झेल गए !
क्यूँ हँस कर फांसी पर झूले, हम ये बतलाने वाले हैं,
ये आज़ाद परिंदे भारत के, इतिहास बनाने वाले हैं !!

जब कान सभी ने बंद करें, फिर भी उनको सुनवा आए,
आज़ाद वतन करवाएंगे, पैगाम उन्हें ये दे आए !
कैसे बहरे सुन सकते हैं, हम वो तान सुनाने वाले है,
ये आज़ाद परिंदे भारत के, इतिहास बनाने वाले हैं !!

ना रहे कोई भूखा – नंगा, ना स्वपन किसी का टूटा हो,
ना अमीर-गरीब की खाई हो, ना भाग्य किसी का रूठा हो !
इस मानव जीवन का सबको, सम्मान दिलाने वाले हैं,
ये आज़ाद परिंदे भारत के, इतिहास बनाने वाले हैं !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment

संघर्ष करो, संघर्ष करो…

Sangharsh Karo

मंजिल पाने से पहले तुम, एक पल का भी ना हर्ष करो !
हर एक ख़ुशी को त्यागो तुम, सुख – चैन को ना स्पर्श करो !!
बिना परिश्रम के प्यारे,  नहीं सफल कोई हो पाया है !
गर कामयाब होना है तो, संघर्ष करो, संघर्ष करो !!

है राह कठिन ये माना है, पर थकना एक बहाना है !
तेरे पैरों के छालों को, जो शीतलता गर पाना है !!
ये सफर तुम्हे तय करने है, चाहे जितना भी हो वो कष्ट सहो !
गर कामयाब होना है तो, संघर्ष करो, संघर्ष करो !!

माना घनघोर अँधेरा है, पर होना भी तो सवेरा है !
तू विमुख कदापि मत होना, कर्त्तव्य रहा जो तेरा है !!
फिर नाम तुम्हारा गुंजेगा, जो कर्त्तव्यनिष्ठ संकल्प करो !
गर कामयाब होना है तो, संघर्ष करो, संघर्ष करो !!

तू निर्धन है ये मान लिया, तुझको बेघर भी जान लिया !
पर निर्बल तुझको कैसे मानूँ, तेरा आत्मबल जो पहचान लिया !!
जो भाग्य बदलना है खुद का, न व्यर्थ के विचार – विमर्श करो !
गर कामयाब होना है तो, संघर्ष करो, संघर्ष करो !!

मैदान छोड़ मत भागो तुम, उत्साह के गोले दागो तुम,
अब तो चिरनिद्रा को त्यागो, हो रहा सवेरा जागो तुम !
ये पर्वत भी झुक जायेंगे, यदि प्रयासों का उत्कर्ष करो,
गर कामयाब होना है तो, संघर्ष करो, संघर्ष करो !!

 

Posted in Uncategorized | Leave a comment

आज के द्रोणाचार्य…..

Aaj ke Dronacharya

गुरु दक्षिणा में एकलव्य का जिसने, लिया अंगूठा काट !
वो सोच रहे हैं कैसे छीनू, इससे ज्ञान का पाठ,

आज भी जो एकलव्य कहीं पर, गर शिक्षित हो जाता है,
द्रोण सा शिक्षक उसके, ज्ञान पे रोक लगाता है !

युगों से चलता आया है, पर बदला नहीं ये काज,
तभी तो रोहित जैसे छात्रों की बलि चढ़ती है आज !

धर्म की आड़ में एक गुरु ने शिष्य का जीवन माँगा,
अपने को निर्दोष बता कर शिष्य को शूली पर टांगा !

जाने अब क्यों कहलाते हैं देशद्रोही हर वो छात्र,
सच्चाई के लिए ही लड़ना राह है जिसका मात्र !

खुद को द्रोण और इन्हे मानते एकलव्य सा पात्र,
कैसी शिक्षा निति है ये, कैसे हैं ये शास्त्र !

भेद-भाव और कपट लिए ये करे घिनौना कार्य,
देख लो बंधु कितने शातिर है आज के द्रोणाचार्य !

Posted in Uncategorized | Leave a comment

मंत्री जी का गांव…..

village-houses_north-india1 - Final

आज घूमने गया था जब मैं मंत्री जी के गांव,
धूप मुझे हर और दिखी, पर दिखी नहीं कहीं छाँव !
नाली सारी जाम थी और कीचड़ पसरे से गलियों में,
सन गए गांव में घुसते-घुसते कीचड़ से मेरे पाँव !!

स्वागत किया उन टूटी सड़कों ने जिससे हम थे आए,
गड्ढों और पानी ने उस पर चार चाँद थे लगाए !
बिखरे कूड़ों पर हर ओर पशु थे चरने आए,
इससे आती खुशबू ने सबके मुँह पर थे रुमाल लगवाए !!

जैसे तैसे गांव में जाकर देखा बिजली का हाल,
जून महीने में सब रहे थे हाथ से पंखा चाल !
आंसू और पसीना दोनों गाल पे संग थे बहते,
मंत्री जी ने इस गांव का क्या खूब किया देख-भाल !!

स्कूल भी उस गांव में था मरघट सा सुनसान,
बैठे थे सब अध्यापक भी जैसे मूरत जान !
छात्रों की कुछ झुण्ड रहे थे मस्ती मार,
कुछ थे पेड़ के नीचे बैठे, आतुर पाने को ज्ञान !!

हमने पूछा है इस गांव में कोई बढ़िया मकान,
सबने दिखा दिया मंत्री-परिजन का बंगला आलीशान !

टूटे-फूटे घर थे और थी उजड़ी सबकी छप्पर,
पूरे गांव की हालत जैसे सदियों पुराना खण्डहर !
दिखा विकास उस गांव में बस चंद लोगों के ऊपर,
वो था पार्टी कार्यकर्त्ता और मंत्री-परिजनों का घर !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment