वज़ीर-ए-आलम की विदेश की यात्रा…

ak

गए वज़ीर-ए-आलम जब करने विदेश की यात्रा,
लाऊंगा तुम सब के लिए कुछ, बतला तो दो मात्रा !

ले आऊंगा कई जहाज और शक्तिशाली हथियार,
देख के जिनकी ताकत, शत्रु भी कांपेंगे यार !

ले आऊंगा पल में मीलों दौड़ने वाली गाड़ी,
ख़ुशी से जिमसे सफर करेंगी, मेरी जनता सारी !

मेरे वक्तव्यों से बजेगा, देश के नाम का डंका,
सब मिल कर जयकार करेंगे, क्या है कोई शंका ?

हमने बोला, ये तो ठीक है पर सुन लो सरकार,
पहले जनता की मूल-समस्या का तो करो उपचार !

क्यों आज भी लाखों आबादी, गन्दी बस्ती में रहती हैं,
क्यों मेहनतकश मजदुर देश में, ज्यातती सबकी सहती है ?

क्यों आज भी देश के लाखों बचे, फुटपाथों पर पलते है,
क्यों धर्म-जात के विषधर, देश में चौड़ी छाती कर चलते है ?

क्यों रोज़गार के लिए यहाँ पर, खड़े करोड़ों यार हैं,
क्यों शिक्षा और चिकित्सा का यहाँ, लगता नित बाजार है !

क्यों इस देश में आज भी भूख से सैकड़ों बच्चे मरते है,
क्यों धर्म के नाम पे अंधे हो सब, पागलों की तरह लड़ते है ?

पशु प्रेम में बहके ऐसे की ले रहे इंसानों की जान,
प्रेम से पशु तो बनते मानव, पर क्यों इन्सां हो रहे हैवान ?

मेरे मालिक तुम ही बतला दो, कब होगी ऐसी बिहान,
जहाँ जाति-धर्म और आमिर-गरीब सब हो एक सामान !

गर दे सकते हो दे दो, ये छोटा सा उपहार,
मिल जाये इस देश में सब को रोटी, कपडा और सत्कार !

गर कर सकते हो तो करवा दो शोषणमुक्त ये उपवन,
फिर न कभी यहाँ मुरझाये गरीबी में कोई जीवन !

सबको दे दो मुफ्त में शिक्षा और चिकित्सा का अधिकार,
यहाँ रहे न कोई बेरोजगार और न हो देश में कोई भ्रष्टाचार !

ला सको ये उम्मीद अगर, मेरे साहब सचमुच ले आना,
जब सब को सब मिल जाये तो फिर, कुछ के लिए कुछ ले आना !!

Advertisements
Posted in Uncategorized | Leave a comment

मेरे भारत तू ही बता दे…

download - Copy

मेरे भारत तू ही बता दे, धर्म बड़ा या कर्म बड़े !
एक ही गर ये सारे, तो फिर जाति-धर्म पे क्यों ये लड़े !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कैसा देश हम तुझे कहे !
तुझको गर बोले धर्म- निरपेक्ष, तो फिर कुछ क्यों हिन्दू-राष्ट्र कहे !!

मेरे भारत तू ही बता दे, क्यों सब अत्याचार सहे !
एक है जब हम भारतवासी, तो फिर क्यों यहाँ मानव-रक्त बहे !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब ये सच को अपनायेंगे !
ढोंग पाखंड से मानव-मुक्ति, कब जा कर हम पाएंगे !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब हर मानव विज्ञान से नाता जोड़ेगा !
कब हक़ छिन जाने का ठिकड़ा, भाग्य पे हर कोई फोड़ेगा !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब तक, सत्ता पर लालच बैठेगा !
कब जा कर इस देश का बेटा, कुर्सी से इनको खींचेगा !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब तक झूठ ही जीतेगा !
कब जा कर इंसाफ के लिए, सदियों समय न बीतेगा !!

मेरे भारत तू ही बता दे, किस दिन नारी चैन से सोएगी !
कब तक वो इंसाफ की आस में, खून के आंसू रोएगी !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब तक ऐसा होएगा !
किसी के पास हो 10-10 महलें, कोई सडकों पर ही सोएगा !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब रीत ये तोड़ी जाएगी !
अन्न उगाने वालों के घर, ना भूख से मौतें आएगी !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब ये शोषण बंद होगा !
कब मजदूर-किसानों के जीवन में आनंद होगा !!

मेरे भारत तू ही बता दे, इंक़लाब कब आएगी !
सदियों से शोषित-कुचली जनता, कब हुंकार लगाएगी !!

मेरे भारत तू ही बता दे, कब यहाँ ऐसा आलम होगा !
किसी के पास न बहुत अधिक, और किसी के पास न कम होगा !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment

अब भगवान न आने वाले…

बन अर्जुन गांडीव उठा ले,
खुद गीता के श्लोक तू गा ले !
हक़ के लिए तुझे लड़ना है
अब भगवान न आने वाले !!

गद्दारों ने जब से राज संभाला,
देश का निकल गया दिवाला !
बेच रहे ईमान सडकों पे,
उठ कर के ये देश बचा ले !!
हक़ के लिए तुझे लड़ना है,
अब भगवान न आने वाले !!

भूख से बच्चे मर जाते है,
पर अन्न गोदाम में सड़ जाते है !
हक़ के लिए ये लड़े नहीं पर,
धर्म के नाम पे लड़ जाते है !!
धर्म के नाम पे भटकी भीड़ को,
बढ़ कर सच्चा राह दिखा ले !
हक़ के लिए तुझे लड़ना है
अब भगवान न आने वाले !!

हर मज़दूर-किसान का जीवन,
भूखा पेट और नंगा है तन !
शोषण की चक्की में पिस के,
बना हैं पूंजीपति का सेवन !
इस शोषण का तोड़ चक्रव्यूह,
समानता का नियम बना ले !
हक़ के लिए तुझे लड़ना है
अब भगवान न आने वाले !!

अब ना धृत क्रीड़ा का चलन हो,
ना द्रोपदी का चीड़ हरण हो !
अब अत्याचारी अठ्ठाहस करे ना,
ना किसी अभिमन्यु का मरण हो !!
तोड़ दे सारे दुष्चक्रों को,
सफल ना हो शकुनि की चालें !
हक़ के लिए तुझे लड़ना है
अब भगवान न आने वाले !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment

ये मत पूछो….

Ye Mat Puchho

तुम बिन वर्षों बीत गए,
पर कैसे बीते, ये मत पूछो !
नींद न आई इन अँखियों में,
फिर भी हमने, रात बिताई !!
बीत गई, ये रैना भी तुम बिन,
पर कैसे बीती, ये मत पूछो !!!

तुम बिन ये सावन भी आया,
अँखियों ने रिम-झिम बरसाया !
बिन साजन, ये दिल मुरझाया,
लेकिन ये सावन भी बीता,
पर कैसे बीता, ये मत पूछो !!!

राह तुम्हारी तकते रहे हम,
नाम तुम्हारा जपते रहे हम !
पर तुम तक आवाज़ न पहुंची,
हर पल तुम बिन, मरते रहे हम !!
हम तुमसे बिछड़ कर, मर भी न सके,
पर कैसे जिए, ये मत पूछो !!!

तुमसे बिछड़ के रहना था मुश्किल,
दर्द-ए-जुदाई सहना था मुश्किल !
फिर भी बिछड़ के रहते रहे हम,
दर्द जिगर का सहते रहे हम !!
पर कैसे सहे, ये मत पूछो !!

तुम बिन वर्षों बीत गए,
पर कैसे बीते, ये मत पूछो !
पूछ लो सारी बातें मुझसे,
पर तुम बिन थे कैसे, ये मत पूछो !!
तुम बिन वर्षों बीत गए,
पर कैसे बीते, ये मत पूछो !!!

Posted in Uncategorized | Leave a comment

….लेकिन सब कुछ अच्छा है????

NoGood_NotGood_800x800

प्यारा है राम या रहमाना ? क्या जबरन हम बुलवाएंगे,
एक को नीचा एक को ऊँचा, क्या हम ऐसा दिखलायेंगे ?
क्या यही पढ़ा है हम सब ने गीता और कुरानों में,
क्या अपने रब के संदेशों को हम ऐसे ही फैलाएंगे

ये देश जल रहा दंगों में, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे गिनती होती भुखमंगो में, लेकिन सब कुछ अच्छा है !
चाहे भीड़ बना उन्मादी हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे रोती हर आबादी हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है !!

चाहे बेरोजगार युवा पीढ़ी हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे शाख हमारी गिरी हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है !
चाहे सैनिक होते शहीद रहे, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे आत्मा नोचते गिद्ध रहे, लेकिन सब कुछ अच्छा है !!

चाहे भूक से बच्चा मरते हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे अन्न गोदाम में सड़ता हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है !
चाहे किसान कर्ज से मर जाए, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे घोटाला करके कोई भग जाये, लेकिन सब कुछ अच्छा है !!

चाहे बेटियां न महफूज रहे, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे अत्याचार की छूट रहे, लेकिन सब कुछ अच्छा है !
चाहे कानून की उड़ती धज्जियां हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है,
चाहे नित पैसों की रंगरलियां हो, लेकिन सब कुछ अच्छा है !!

किस बात पे यारों गर्व करें, जब बस्ती सारी सहमी है,
ये गलियां सूनी – सूनी है और रातें भी बेरहमी है !
जब ईश्वर के जयकारे लगे, पर उसे सुन कर रोता बच्चा है,
ये देश जल रहा दंगों में, क्या सचमुच सब कुछ अच्छा है ??????

Posted in Uncategorized | Leave a comment

गर अमर भगत सिंह के सपनों को, पूरा कर के दिखलाना है, …

bhagat-singh.jpg

गर अमर भगत सिंह के सपनों को, पूरा कर के दिखलाना है,
जो लहू पड़े है ठन्डे उनमे, पहले उबाल फिर लाना है !
इन रक्त पिचासी नेताओं से कुछ भी उम्मीद तुम मत रखो,
इस सड़ी-गली व्यवस्था को, अब तुमने ही पलटाना है !

ये तर्क नहीं करने वाले, जब तुम सच्ची बात बताओगे,
ये बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे, जब आईना इनको दिखाओगे !
बस बाँटेंगे तुमको धर्मों में और आपस में लड़वाएंगे,
ये धर्म का विष ही घोलेंगे, जब तुम रोज़ी-रोटी दोहराओगे !!
ये पीड़ तुम्हारी हर लेंगे, ये इनका महज दिखावा है,
इनकी सारी करतूते अब, इस जनता को बतलाना है !
गर अमर भगत सिंह के सपनों को, पूरा कर के दिखलाना है,
जो लहू पड़े है ठन्डे उनमे, पहले उबाल फिर लाना है !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment

आज भगत सिंह होता तो, वो फूट-फूट कर रो देता…

Bhagat Singh

देख वतन में ये तस्वीरें, पलके अश्कों से धो देता,
गर आज भगत सिंह होता तो, वो फूट-फूट कर रो देता !!

किसके लिए चढ़े फांसी पर, किसके लिए रहे भूखे,
किसके लिए सही सब पीड़ा, पर फिर भी मस्तक नहीं झुके !
किसके लिए जवानी अपनी अंगारों पर डाल दिया,
चलते रहे कटीले पथ पर, कदम कभी न उनके रुके !!
काश समाजवाद का पौधा, वो हर सीने में बो देता !
गर आज भगत सिंह होता तो, वो फूट-फूट कर रो देता !!

भगत सिंह को ज़िंदा सबने, रखा बस तस्वीरों में,
बाँध दिया उनके विचार को, पूंजीवादी जंजीरों में !
भगत सिंह को माने हम, पर बात न उनकी मानेंगे,
भगत सिंह फिर पा न सके हम, भारत की तकदीरों में,
आज भी मेरा वतन, हमारे भगत सिंह को खो देता !
गर आज भगत सिंह होता तो, वो फूट-फूट कर रो देता !!

Posted in Uncategorized | Leave a comment